Wednesday, October 22, 2008

poem - kavita

प्‍यार

दो अक्षरों का मिलन
चार आँखों की दास्तान
दो दिलों का फर्माना
खुदा दिया वरदान।

यही प्‍यार है सनम
दिल धड़कता है
किसी की याद में
किसी की चाह में
किसी की इतबार में
यही प्‍यार है सनम

आंखें निहारती हैं
किसी की राह में
किसी के इंतज़ार में।

लेकिन दिल !
ढेर सारा दर्द बख्‍श कर
हमें वीरान में छोड़कर

खुद चैन से सो जाता है

हमें बेचैन करता है।





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