जीवन के पथ पर चलते रहना,
प्रगति के रथ पर आगे बढ़ना
सुख दुःख का क्रम तो आता ही रहता
फूल और कांटे तो बिखरते रहते
व्यथा बढ़ती रहती है
फिर भी तुम...
कभी न अपने रास्ते से डगमगाना
विभीषिकाओं से विचलित न होना
कर्त्तव्य अपना कभी न भूलना।
मंज़िल तुझे मिले या न मिले
कर्ममार्ग पर अडिग रहना।
जन्म एक प्रश्न हो तो...?
कर्म उसका जवाब है।
इसके लिए फल की आशा न करना
आत्मनिर्भर होकर हमेशा रहना
कभी न अपना मनोबल खोना
यह तो एक जीवन सत्य है।
उगते हुए सूरज को
हजारों मेघ भी न रोक सकते।
जीवन में आती हैं बाधाएँ अनेक
कभी न खोना अपना विवेक
ज़िंदगी के मकसद का प्रचार करना
जीवन के पथ पर चलते ही रहना।
1 comment:
आपने भारतीय चिंतन को अपनी कविता में सुंदर एवं प्रेरक अभिव्यक्ति दी है, बधाई स्वीकार्य हो । - श्रीविराज
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