गुजारिश
ये मेरे गीत दुनियांवालों के लिए है
ये मेरे गज़लें बस तुम्हारे लिए है
आंखों में जो आसूँ बह रहे हैं
सीने को जला रहे हैं
यादें अब दिल को जला रही हैं
कुछ दर्देहायत ऐसे हैं
वह मरते दम तक साया बनते
कुछ दर्द खास हैं
वह दिल को लगाने के लिए है
सीने में छिपाने के लिए हैं
कुछ हाथ होते, फूल तोडने के लिए
और कुछ दीप, जलाने के लिए है,
तश्रीफ व बिदाई के लिए है
हमारे हाथ तो अश्कों को, पोछने के लिए है
यादों को दिल से मिटाने के लिए है
बडे ही अरमान आपने से तराशा है ये गोरा बदन
हम ये न जाना
यूँ तो हवस बुझाने के लिए है ।
यादें
दिल से तेरी याद भुलाई न जाती
यह हुस्न की दौलत ऐसी मिठाई नहीं जाती
जिगर के खून से बनाई थी तस्वीर तेरी
तकदीर के हाथों से मिटाई नहीं जाती
तेरी यादें हमें इस ज़माने में
कहां कहां ले जा रही हैं
दिल की लगी को
भंवर में कस्ती बन उटाफटक रही है
हमें भूल जाओ कहकर
किस दिल से तुम कहते हो
हे संश दिल सनम कुछ तो जान लो
तकदीर को कुछ पल लुटा सकते है
यह खूबसूरत नज़ारे तो
हर रोज बनाएं नहीं जाते ।
***




