Saturday, May 28, 2011

दो कविताएँ

गुजारिश

ये मेरे गीत दुनियांवालों के लिए है

ये मेरे गज़लें बस तुम्‍हारे लिए है

आंखों में जो आसूँ बह रहे हैं

सीने को जला रहे हैं

यादें अब दिल को जला रही हैं

कुछ दर्देहायत ऐसे हैं

वह मरते दम तक साया बनते

कुछ दर्द खास हैं

वह दिल को लगाने के लिए है

सीने में छिपाने के लिए हैं

कुछ हाथ होते, फूल तोडने के लिए

और कुछ दीप, जलाने के लिए है,

तश्‍रीफ व बिदाई के लिए है

हमारे हाथ तो अश्‍कों को, पोछने के लिए है

यादों को दिल से मिटाने के लिए है

बडे ही अरमान आपने से तराशा है ये गोरा बदन

हम ये न जाना

यूँ तो हवस बुझाने के लिए है ।

यादें

दिल से तेरी याद भुलाई न जाती

यह हुस्न की दौलत ऐसी मिठाई नहीं जाती

जिगर के खून से बनाई थी तस्‍वीर तेरी

तकदीर के हाथों से मिटाई नहीं जाती

तेरी यादें हमें इस ज़माने में

कहां कहां ले जा रही हैं

दिल की लगी को

भंवर में कस्‍ती बन उटाफटक रही है

हमें भूल जाओ कहकर

किस दिल से तुम कहते हो

हे संश दिल सनम कुछ तो जान लो

तकदीर को कुछ पल लुटा सकते है

यह खूबसूरत नज़ारे तो

हर रोज बनाएं नहीं जाते ।

***

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