
रोशनी
जब तुम मेरे जीवन की दहलीज़ पर आयी,
मैंने अपने को ख़ुशनसीब माना
ख़ुदा की रहमतों की बारिश हुई
ज़िक्र से हमें दुनिया के फिक्र सब दूर होने लगे
कांटों के रास्ते में, ख़ुशबूदार फूल खिलने लगे
ज़िंदगी की नैय्या संसार के सागर में, सुकून से चलने लगी।
हमसफ़र बनकर तुमने,
जीवन सफ़र को सफल बनाया
लाखों तूफ़ान आने पर भी
जीवन के कश्मकश से कभी घबराये नहीं
आँसू व मुस्कान का सफ़र
तक़दीर का इनसाफ़ सबके लिए बराबर है
वक्त इतना बेरहम भी होता
हमने सोचा न था
तुम्हारे जाने के बाद हमें यह मालुम हुआ कि
तक़दीर के आगे सारे काम बे-लगाम हैं
तुम्हारे उसूल का हम पालन करेंगे
तुम्हारे ख्याल में घुल-मिल जाएंगे
तुम्हारे इरादों को हम मज़बूत करेंगे
तुम्हारा मुस्कुराता चेहरा
तुम्हारी आँखों की रोशनी को
क्या हम कभी भूल पायेंगे ?
4 comments:
wow, its really nice poem, narration with true feelings,its an amazing poetry,,hats off sir....
sis is really lucky, your Roshni poetry is reflecting that how much u r missing her...
तुम्हारा मुस्कुराता चेहरा
तुम्हारी आँखों की रोशनी को
क्या हम कभी भूल पायेंगे ?
Hat's of to your true love. There are very few people in this busy world still remember their loved ones, but you have proved it through this poem, your are some one special not only SIS but for all of us.
SHAKH K VALI
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